संदर्भ : मन्नू 

मौलाना अबुल कलाम आजाद :  प्रमुख विद्या वेता, इन्होंने भारतीय सामाजिक - सांस्कृतिक अंशों पर कई लेख लिखे हैं| 14 वर्ष की आयु में ही "दि वॉयस ऑफ ट्रुथ" नामक प्रमुख पत्रिका का सम्पादन किया है| इनके रचनों में भारत के प्रति प्रेम और मातृभूमि के विकास के प्रति विचार थे| आजाद भारत में गरीबी हटाना चचते थे| 


स्वतंत्रता संग्राम में अंग्रेजों के खिलाफ आवाज़ उठाने में प्रथम पंक्ति में खड़े थे|  इनकी बाल्यावस्था कोलकाता में गुजारे हैं इसके साथ - साथ उर्दू , हिन्दी , पर्शियन , अरबिक और बंगाली भाषाएं जानते थे|  गणित में प्रवीण थे| अँग्रेज़ हिन्दुस्थान को दो भागों में बांटना चाहते थे लेकिन आजाद इस काँग्रेस वर्किंग कमिटी चर्चा का बहिष्कार किया | हिन्दू - मुस्लिम एकता के लिए और भेद -भाव को समाप्त करने का कोशिश अपनी रचनाओं के माध्यम से की राष्ट्र में धार्मिक संघर्ष को दूर कर एकता के साथ खुशियाली लाना चाहते थे|


स्वतंत्रता के बाद (1947 -1958) भारत के शिक्षा मंत्री बने, बाल - बालिकाओं को प्राथमिक शिक्षा प्रदान करने के कार्यान्वयन में लीन होगए | "विन्स ऑफ फ्रीडम" रचना में इनकी संघर्ष यात्रा के कुछ पल गहराई से समझ सकते हैं | 


आज का भारत उन्नति की ओर आगे बड़ रहा है| आने वाले समय में विदेशी विश्वविद्यालय भारत आने वाले हैं इसके जड़ आज़ाद जी के विचारों से निकले हैं | इन्होंने उस समय दिल्ली में जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय की स्थापना की और यूनिवर्सिटी ग्रांटस कमिशन, आई आई टी आदि संस्थानों की स्थापनाएं इनकी विचारों की देन है| 

आज के दिन प्रमुख देश भक्त अबुल कलाम जी को स्मरण करना बहुत जरूरी है| 

स्रोत : मन्नू