भारत : अंतर्राष्ट्रीय बैकलोरिएट (IB) पाठ्यक्रम ने भारतीय स्कूलों पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाला है, शिक्षा में सकारात्मक परिवर्तनों को बढ़ावा दिया है।

International Curriculum in India


2023 के समाचार पत्रों में देखा गया है कि आंध्र प्रदेश राज्य के गौरव नियम मुख्यमंत्री श्री जगन मोहन रेड्डी जी ने यहां फैसला लिया है कि सरकारी विद्यालयों में इंटरनेशनल बैकलोरियट (आईबी) का करिकुलम शुरू करना चाहते हैं मुफ्त में ग्रामीण क्षेत्र के छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना चाहते हैं। 


यह एक साधारण बात नहीं है, बहुत गहरा विषय है इसे समझने के लिए आपको इंटरनेशनल बैकलोरियट के बारे में सामान्य जानकारी होना बहुत आवश्यक है और इसके साथ-साथ शिक्षा - शिक्षक, भारतीय शिक्षा व्यवस्था पर भी आपको सामान्य जानकारी होना चाहिए तभी आपको अच्छी तरह से समझ में आएगा यह एक राजनीतिक मुद्दा नहीं है यह एक राष्ट्र और राज्य को आगे बढ़ाने के लिए और भारतीय शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए लिया गया फैसला है इसे प्रति राज्य अपनाना चाहिए इसी पर भी उस राज्य का भविष्य निर्भर रहता है।


हम सामान्य रूप से देखते हैं कि राज्य सरकार द्वारा चलाई जाने वाले विद्यालयों में स्टेट बोर्ड का पाठ्यक्रम पढ़ाया जाता है और इसमें गुणवत्ता लाने के लिए सीबीएसई का पाठ्यक्रम को भी आंध्र प्रदेश और तेलंगाना और इसके साथ कई राज्यों में लागू किया गया है और केंद्रीय विद्यालय, नवोदय विद्यालय और आदि इस तरह के संगठन सीबीएसई पाठ्यक्रम को पढ़ने में अपना योगदान दे रहे हैं लेकिन अभी तक सरकारी स्कूल में इंटरनेशनल बैकलोरियट के पाठ्यक्रम को लागू करने का निर्णायक किसी भी सरकार ने नहीं की है पहली बार आंध्र प्रदेश राज्य में 2025 के नर्सरी से इंटरनेशनल बैकलोरियट का कार्यक्रम लागू होने की संभावना है।


इतिहास के आधार पर हमें जो जानकारी मिली है| शिक्षा व्यवस्था में यह एक महत्वपूर्ण घटना के रूप में हम देख सकते हैं यहां सामान्य बात नहीं है। उदाहरण के लिए जापान राष्ट्र में इस तरह का निर्णय लिया गया था, वह आपको स्पष्ट रूप से और सरल रूप से आपको समझाने का कोशिश करेंगे आप इस आर्टिकल को पूरा पढ़िए।



पहले मुख्य विषय यह है कि यह (आईबी) बहुत अच्छा करिकुलम है विश्व स्तर पर अपनी मान्यता रखता है। फिर विश्व में कई विद्यालय इसी पाठ्यक्रम को अनुसरण करते हैं, इसके साथ-साथ यह बहुत महंगा भी होता है। और इसमें बहुत गुणवत्ता रूप की शिक्षा प्रदान की जा सकती है और यहां के शिक्षकों को सरकारी शिक्षकों को ट्रेनिंग दे करके ट्रेनिंग देने के बाद फिर इंटरनेशनल करिकुलम को आंध्र प्रदेश सरकार के कुछ विद्यालयों में लागू करना चाहता है| इससे बहुत फायदा होगा इसमें पाठ्यक्रम विधिक विषय पर निर्भर रहते हैं जैसे सिर्फ परीक्षा के लिए नहीं, छात्रों का सर्वांगीण विकास हमें देखने के लिए मिलेगा और इसी के साथ-साथ और विषय ज्ञान भी बहुत बढ़िया रहेगा जैसे भाषा विषय और विज्ञान आदि जितने भी जो हम लोग प्रयोगशाला में प्रयोग करते हैं मतलब इन प्रयोगशालाओं पर भी बहुत गहरे रूप से ध्यान दिया जाएगा| 




 एक बात स्पष्ट नहीं है की सरकार के पास जो अभी विद्यालय है मतलब उसी को विकास करके एक बड़ा विद्यालय बनाकर के उसमें आईबी पाठ्यक्रम लागू करेंगे या नए-नए विद्यालय फिर से बनाए जाएंगे? मतलब जिला स्तर पर या ब्लॉक स्तर पर ऐसे नए इमारतें बनाए जाएंगे और सोचने वाली बात है! 


शिक्षा व्यवस्था में जितने भी शिक्षक है उसमें से जो जितने भी जिज्ञासु है, जागरुक है मतलब फिर जो नए-नए कौशल सीखना चाहते हैं जो आईटी और कंप्यूटर के बारे में ज्ञान रखते हैं इन लोगों को और भी अच्छी तरह से ट्रेनिंग देकर के जितने भी क्वालिफाइड योग्य टीचर से प्रोफेशनल टीचर से आईबी पाठ्यक्रम करेगा| फिलहाल शिक्षकों को एक और छोटी सी परीक्षा देने के बाद अंग्रेजी फिर कंप्यूटर नए नए विषय ज्ञान देने के बाद फिर उनको ट्रेनिंग के बाद इनको पोस्टिंग देने से बहुत बढ़िया होगा|  और जितने भी स्टेट और सेंट्रल में क्वालिफाइड शिक्षक है आईबी पाठ्यक्रम पढ़ाने के लिए मिल जाएंगे भारत में इतने ज्यादा शिक्षक हैं मिलते हैं लेकिन सरकार को ध्यान रखना है कि आलसी शिक्षकों को नहीं लेना चाहिए क्योंकि सरकार में कुछ-कुछ शिक्षक आलसी भी होते हैं हमें देखने के लिए आंकड़े मिलते हैं जब तक नौकरी नहीं मिलती है तो बहुत बढ़िया तैयारी करते हैं जब एक बार सरकारी नौकरी लग जाएगी तो कुछ पेड़ - कैंटीन के पंखे के नीचे बैठ जाते हैं लेकिन पढ़ने में उनका मन नहीं लगता है, सिर्फ उनका पैसा फिर सिर्फ क्या बोलते हैं व्यापार में लगे रहते हैं मतलब अपने पैसे कैसे बचा लेना है  कैसे दोगुना करना है फिर किस में इन्वेस्टमेंट करना है फिर वह इतना पढ़ने में रुचि नहीं रखते हैं सिर्फ पैसे के लिए इस सरकारी भर्ती में आते हैं उसे तरीके की शिक्षकों को इस विषय से दूर रखना चाहिए|  योग्यता के आधार पर हम लोग किसी को दूर रखना नहीं चाहते हैं लेकिन उनको जब पढ़ाना पसंद नहीं है तो उनसे आउटपुट नहीं आएगा|  इस अंतरराष्ट्रीय बैकलोरियट स्कूल का आउटपुट आना चाहिए तो मेहनती शिक्षक होना चाहिए आलसी लोगों को कभी भी नहीं लेना है सरकार यहां बात ध्यान में रखनी चाहिए|  चाहे वह राज्य सरकार हो या राष्ट्र सरकार| 



यह मुद्दा राजनीतिक नहीं है थोड़ा अलग है मतलब हमें राजनीतिक से अलग करके देखना चाहिए चाहे जो भी सरकार बदले या जो भी पार्टी बदलें , भविष्य में  जो भी पार्टी रूलिंग में आए तो उस पार्टी शिक्षा व्यवस्था पर बहुत नजर रखनी चाहिए और नए-नए जितने भी अपडेट है उसे लेकर के आना - अमल करना भी चाहिए मतलब तभी बेहतर शिक्षा प्रदान सकते हैं आने वाले पीडियों के लिए।




इतनी महंगी शिक्षा को सरकार मुफ्त में ग्रामीण और क्षेत्रीय बाल - बालिकाओं को देने का प्रयास कर रहे हैं इसके लिए मैं अपने मन से उस सरकार को बहुत-बहुत धन्यवाद देना चाहता हूं  और शुभकामनाएं यह भी देना चाहता हूं|  फिर हमारा सपोर्ट हमेशा रहेगा और जो हम सब आभारी रहेंगे इन जो भी सरकार इसको पूरी तरह लागू - अमल करेगी और लगभग हमें देखने के लिए फल मिलता है कि 2037 तक 12वीं कक्षा तक आईबी पाठ्यक्रम लागू हो जाएगा देखेंगे क्या होगा और थोड़ा विश्वास रखेंगे।



 आंध्र प्रदेश सरकार की यह एक महत्वपूर्ण सोच है कि सरकारी विद्यालयों में आईबी लागू करना क्योंकि अभी तक भी आईबी करिकुलम हर राज्य में नहीं पहुंच सका है हमें सिर्फ गिने-चुने विद्यालय मिलेंगे वह भी बड़े-बड़े शहरों में,  उदहारण : आंध्र प्रदेश, तेलंगाना,  तमिलनाडु इस राज्यों में सिर्फ अल्प संख्याओं में ही हमें देखने के लिए विद्यालय मिलते हैं|  आईबी कार्यक्रम के साथ यहां पर पढ़ना फिर जो जिन स्टाफ़ की तनख्वाह देना बहुत बड़ा पैसों का मामला है|  मतलब पैसों की कोई जिम्मेदारी लेना नहीं चाहता है लेकिन राज्य सरकार बहुत आगे आई है मतलब हर जगह पर छात्रों को इतनी बढ़िया शिक्षा प्रदान करना चाहती है  इसको हम अपना सौभाग्य समझना चाहिए।




एक बार आंध्र प्रदेश और तेलंगाना की हालत और वहां की राजनीतिक समस्याएं फिर सरकार को क्या-क्या समस्याएं हैं? मतलब इस करिकुलम के विषय में इसे समझेंगे :-  क्योंकि कुछ गैर सरकारी विद्यालय अंग्रेजी माध्यम में और सीबीएसई करिकुलम पढ़ाते हैं और अंतर्जातीय पाठ्यक्रम भी पढ़ाते हैं इस विषय उनके छात्रों को फिर उनके जो छात्रों के माता-पीताओं को बात कर उनसे अधिक पैसे वसूल करते हैं| 

इसी पाठ्यक्रम को इतनी ही गुणवत्ता से जो शिक्षा सरकार मुफ्त में अगर सरकारी विद्यालय में सभी को प्रदान करेंगे तो? जो गैर सरकारी विद्यालय है वह सरकार पर बहुत दबाव बनाएंगे! क्योंकि (उनका धंधा कैसे चलेगा?) मतलब समाज में जितने भी लोग हैं वह लोग प्रश्न करने लगते हैं कि 'इतनी ही गुणवत्तापूर्ण जैसे शिक्षा मुफ्त में मिल रही हैं सरकारी विद्यालय में' लेकिन तुम इतने लाखों - लाखों में पैसे ले रहे हो और इतनी क्वालिटी भी नहीं है क्यों ? 

तब, गैर सरकारी विद्यालयों को यहां एक बहुत बड़ी चुनौती है|  इस वजह सरकारी योजना को धीरे से चालू करने के लिए, योजना अमल करने में अगले चार-पांच वर्षों के लिए स्थगित करने के लिए कोशिश जरूर जारी होगी (या) नहीं तो इस योजना को लागू नहीं करने देंगे किसी भी हालत में क्योंकि वह अपना फायदा (मुनाफ़ा) उठाना चाहते हैं|  लेकिन यहां की जो सरकार में कुछ अधिकारी है उनको किसी ने भी लालच बताकर नहीं खरीद सकते हैं वह अपने दिल से, अपने मन से कार्यरत हैं वह गरीबों के लिए क्वालिटी से भारी शिक्षा प्रदान करना चाहते हैं|  इसलिए कुछ शिक्षित सरकारी - अधिकारी यह फैसला लिया है की यह किसी से भी नहीं डरेंगे और आने वाले 10-12 वर्षों में सभी छात्रों को बहुत बढ़िया शिक्षा प्राप्त करने का अवसर देंगे| 


अंतरराष्ट्रीय बैकलोरियट (आईबी) पाठ्यक्रम का बहुत बड़ा उद्देश्य है|  वह समझना थोड़ा कठिन है लेकिन सब की भलाई के लिए है| 



शिक्षक सामान्य रूप से यह क्षमता रखता है कि पूरे राज्य और राष्ट्र की भविष्य को सुनहरा बना सकता है व्यवस्था को किसी भी स्तर से बुलंद तक पहुंचा सकता है। 


सरकार चाहे तो गैर सरकारी विद्यालयों से लाखों करोड़ों रुपए लेकर, इस सरकारी आईबी योजना को कुछ वर्षों तक रोक सकती है (या) लागू / अमल  करने से पीछे हट सकती है|  लेकिन ऐसा नहीं किया, क्यों नहीं किया? क्योंकि यह राष्ट्र का भविष्य है पैसे का मामला नहीं | यह राष्ट्र को गर्व का विषय है।


 सिर्फ इसे लागू करने से सब कुछ नहीं होगा! इसको अमल करना चाहिए|  इस आईबी पाठ्यक्रम को नीचे स्तर में जो अधिकारी है, जो शिक्षक हैं, जो छात्र है मतलब उनके बीच में एक अच्छा सम्मान भाईचारा होना चाहिए|  कुछ कठिनाइयां आएंगी तो उसे सब की मदद लेकर के ठीक करते हैं|  एक दूसरे शिक्षा व्यवस्था का करते हुए आगे बढ़ाना बहुत ही जरूरी है|  क्योंकि, सबका साथ - सबका विकास होगा। 


इंटरनेशनल बैकलोरियट (आईबी) पाठ्यक्रम हमें बहुत उपयोगी है, कैसे पता चलता है? हम छात्रों को देख सकते हैं -  विद्यालय से जो छात्र बाहर आते हैं इनमें  कितना ज्ञान है? और कितनी बुद्धि है? और उसके साथ-साथ यह समाज के साथ कैसे रहते हैं? कितने लोग नौकरी करने के लिए योग्य है? कितनों के पास कौशल है? कितने लोग कंप्यूटर जानते हैं? और कितने गुणवत्ता पूर्वक शिक्षण वह लोग सही - सही प्राप्त किए हैं और स्वीकार किए हैं,  और उनको कितनी अंग्रेजी आती है? और कितनी मातृभाषा आती है? फिर उसके साथ-साथ हम देख सकते हैं कि बाहर आने वाला छात्र का भविष्य कैसा है? मतलब उसके ऊपर हम लोग एक छोटा आंकड़ा देख सकते हैं! उसी से हमें पता चल जाएगा कि मतलब यह राष्ट्र के लिए अच्छा है या बुरा| 


बाहर आने वाली छात्रा ही बताएंगे मतलब उनको देखकर के हम समझ सकते हैं कि कुछ दशकों बाद शिक्षा में क्या होने वाला है? आने वाले पीडियों में तो आपको फल प्राप्त करना है तो अब पेड़ लगाना ही होगा मतलब पेड़ बिना लगाए हम फल की रुचि नहीं देख सकते हैं।



मैं भी आपसे एक विषय जानना चाहता हूं क्या आप अपने बच्चों को सरकारी विद्यालय भेजेंगे या गैर सरकारी विद्यालय?



 सुनने में आया है कि स्विट्जरलैंड में स्थित स्थापित किया गया जो आईबी इंटरनेशनल बैकलोरियट करिकुलम है विश्व में 150 से ज्यादा विद्यालयों में अमल किया जा रहा है और स्वीकार भी किया गया है इससे हम इस (आईबी) पाठ्यक्रम की जो डिमांड - मांग को हम देख सकते हैं, समझ सकते हैं मतलब हर जगह इसकी मांग बढ़ते जा रहे हैं| सीखने का एक अच्छा अवसर है।


तनाव रहित शिक्षा प्राप्त करने के लिए यह भी एक मार्ग है।